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घर-बार छोड़ गद्दी पहाड़ों से उतरे
15 Nov 2013 IST
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शिमला, (जितेंद्र ठाकुर)।
हिमाचल प्रदेश में पहाडों पर बर्फबारी के चलते गद्दी समुदाय के लोग अपने घर छोड कर सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। हर बर्ष ये लोग इसी तरह बर्फ के मौसम में पलायन करते हैं। कांगड़ा, कुल्लू, किनौर, शिमला और चम्बा मंे इस समुदाय के अधिकतर गांव हैं। पूरा परिवार भेड-बकरियां और सामान आदि के साथ ये लोग हिमाचल की और नीचे की तरफ कूच कर जाते हैं। बर्फबारी बंद होने के बाद फरवरी-मार्च माह में ही वापस अपने घर लौट पाते हैं।
प्रदेश में दर्जनो ऐसे गांव हैं, जिनमें शार्दियों के मौसम में एक भी इंसान नहीं रहता। प्रदेश में होने वाला यह सबसे बड़ा अस्थाई पलायन होता है। बेशक ये लोग चार से पाँच महीने के लिए ही अपनी जगह से पलायन करते हैं, मगर इन्हें इन चार महीनों मंे जगह-जगह भटकना पड़ता है। गद्दी समुदाय का मुख्य आमदानी का स्रोत भेड-बकरियां पालना ही है, इनके पास सैंकडों भेड-बकरियां होती हैं। जिन्हें ये लोग ऊन के लिए पालते हैं। शार्दियों मे ऊपरी हिमाचल में कई कई फुट बर्फ पड़ता है, ऐसे में इस समुदाय के पशुओं के लिए इतना घास उपलब्ध नहीं हो पाता कि जीव जिंदा रह सकें। हालात और समय की बिडम्बना ने इन लोगों को जीने का ये तरीका सिखा दिया है। ऊपरी हिमाचल में जहां शार्दियों मे घास नहीं मिलता, वही निचले क्षेत्रों मे वर्षा के कारण जंगल इतने बढ़ चुके होते हैं कि उनमें जाने का रास्ता भी नहीं मिलता। ऐसे मे गद्दी समुदाय के लोगों की सैंकडों भेड-बकरियां इन जंगलों के घास को धीरे-धीरे खा कर ना सिर्फ जंगल साफ करती हैं, बल्की इन भेड-बकरियांे की वजह से जंगलों को खाद भी मिल जाती है। ऐसे मे जंगलों और गद्दियों के बीच का ये सामंजस्य बना रहता है।

 

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