Corporate: H-70, Sector-63, Noida (UP), 201301
Studio: C-56, A/20, Sec-62, Noida (UP)

होम बड़ी खबर राज्य खेल विश्व मनोरंजन आस्था
जरा इधर भी व्यापार जोक्स हमारे बारे में पत्रिका
17, January,2018 10:47:26
मेरठ बेटी की मौत का खुलासा एसएसपी ने चारों आरोपियों को मीडिया के सामने पेश कर किया खुलासा प्रेसवार्ता कर एसएसपी ने किया खुलासा गैंगरेप के प्रयास से आहत होकर लगाई थी बेटी ने आग आरोपी फोन कर बेटी को करते थे परेशान दो महीने से लगातार कर रहे थे छात्रा को कॉल दिन में हुआ था गैंगरेप का प्रयास रात में बेटी ने लगाई थी आग लापरवाह एसओ को लाइन हाजिर कर बैठाई जांच बेटी को खुद को जलाने के बाद उपचार के दौरान हुई थी मौत | मेरठ :-अज्ञात युवती का शव मिलने से सनसनी धारदार हथियार से चेहरे पर वार कर की युवती की हत्या गन्ने के खेत मे पड़ा मिला युवती का अस्त व्यस्त शव रेप के बाद हत्या करके शव फेके जाने की आशंका मौके पर पहुँची पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज जांच में जुटी पुलिस थाना परतापुर क्षेत्र के अधेड़ा गांव का मामला | वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय युवा दिवस समारोह को संबोधित किया। | | | केमिकल की दुकान में लगी आग | भदोही- पांच हजार का इनामी धोखाधड़ी का आरोपी गिरफ्तार | स्पेशल टास्क फोर्स ने 10-10 हजार के तिन ईनामी बदमाशों को किया गिरफ्तार | संदिग्ध परिस्थिति में मौत | इलाहाबाद । घूरपुर थाना क्षेत्र के करमा बाजार मे पुलिस टीम पर पथराव पुलिस ने की बचाव मे कई राउन्ड हवाई फायरिग !दुकान मे लगाई गयी आग । |
News in Detail
सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी जमात नेता की मौत की सजा
30 Aug 2016 IST
Print Comments    Font Size  
ढाका।
बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए युद्ध अपराधों के मामले में जमात-ए-इस्लामी के वरिष्ठ नेता एवं प्रमुख वित्त पोषक मीर कासिम अली को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा है। प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने अदालत कक्ष में एक शब्द में ही फैसला सुना दिया। शीर्ष न्यायाधीश ने 64 वर्षीय अली की अपील के बारे में कहा, ‘‘खारिज’’। प्रधान न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार मुस्लिम बहुल देश में इस पद पर आसीन होने वाले पहले हिंदू हैं। अली को जमात का प्रमुख वित्त पोषक माना जाता है। जमात 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की आजादी खिलाफ था।

फैसले के बाद अपनी संक्षिप्त टिप्पणी में अटॉर्नी जनरल महबूब ए आलम ने संवाददाताओं को बताया कि अली राष्ट्रपति से क्षमा याचना कर सकता है। अब यही एक अंतिम विकल्प है, जो उसे मौत की सजा से बचा सकता है। आलम ने कहा, ‘‘यदि वह क्षमा याचना नहीं करता है या अगर उसकी दया याचिका खारिज हो जाती है तो उसे किसी भी समय मौत की सजा के लिए भेजा जा सकता है। अली के वकील टिप्पणी के लिए तत्काल उपलब्ध नहीं हो सके। इस फैसले ने अली को मिली मौत की सजा पर तामील का रास्ता खोल दिया है, बशर्ते उसे राष्ट्रपति की ओर से माफी न मिले । अली मीडिया से भी जुड़ा रहा है। शीर्ष अदालत की ओर से पूरा फैसला प्रकाशित किए जाने और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण की ओर से उसके खिलाफ छह जून को मौत का वारंट जारी किए जाने के बाद अली ने समीक्षा याचिका दायर की थी।


 

Send Comments
Name
Location
Email
Comments
  Please Enter the above Characters
होमबड़ी खबरराज्यखेलविश्व लाइफ स्टाइलआस्था
जरा इधर भी व्यापार जोक्स हमारे बारे में
 
 

 

Copy Rights Reserved By www.indiacrime.in - 2015