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हिरण के बच्चे को बना लिया अपना
15 Nov 2013 IST
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इटावा, (अशोक शाक्य)।
इंसानो और जनवरो के बीच मधुर रिश्तो की कई कहानियां लंबे समय से सुनाई जाती रही हंै, लेकिन संरक्षित वन्य जीवों के किस्से बेहद की कम देखने को मिलते है। यहां हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के कछार गांव की, जहां एक परिवार हिरण के मासूम बच्चे को अपनाया है। उसका अपने बच्चे की तरह पालन-पोषण किया जा रहा है। पानी और दूध भी उसे बोतल से पिलाया रहा है, सिर्फ इतना ही नहीं जिस परिवार में हिरण के बच्चे को पाला-पोसा जा रहा हैं, उस परिवार के छोटे-छोटे बच्चें भी उसके साथ खिलौना समझ करके खेलते हंै।
ऐसा कहा जा रहा है कि हिरण का यह मासूम बच्चा जंगल से उस हालात में भटक कर गांव तक आ पहुंचा है, जब कुत्ते उसे अपना निवाला बनाने के इरादे से उसके पीछे दौड रहे थे। जंगल से भटककर गांव में पहुंचा हिरण का बच्चा कोतवाली थाना क्षेत्र के भिंड रोड स्थित यमुना के निकट कछार के नंगला में जा पहुंचा।
ग्रामीण देवी दयाल राजपूत ने गांव के निकट भटक रहे हिरण के बच्चे को खूंखार जंगली जानवरों से बचाया और अपने घर ले आया। ग्रामीण ने इस संबंध में वन विभाग को सूचना दी, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। बच्चे हिरण को रोटी सब्जी और बोतल से दूध पिलाते है। जब कोई ग्रामीण हिरण के बच्चे को उनके घर से ले जाने की बात कहता है तो वे रोना शुरू कर देते हैं। हिरन के बच्चे को पाल रही श्रीमती मायावती बताती है कि उनके घर के बाहर यह मासूम हिरण का बच्चा भटक करके आ गया उसके बाद उसको घर मे पाल लिया है हम लोग उसको बोतल से दूध पिला रहे ताकि वो जीवित रह सके।
मायादेवी की कक्षा नौ मे पढने वाली बेटी ज्योति बताती है कि हिरन का यह मासूम सा बच्चा अपने परिवार से बिछुड करके हमारे घर मे आ गया है हिरन के भटकने से उसकी मां का हाल बहुत ही बुरा होगा, लेकिन हम लोग हिरन को पूरी तरह से सही ढंग से रखने की कोशिश कर रहे हैं।
हिरण के बच्चे के जंगल से भटक करके निकल आने के वाक्य के बारे मे पर्यावरणीय संस्था सोसायटी फार कंजरवेशन आफ नेचर के सचिव डा.राजीव चैहान का कहना है कि चंबल इलाके मे हिरनो की खासी तादाद है। आए दिन स्थलीय सर्वेक्षण के दौरान हिरणों और उनके बच्चों के झुंड को देखा जा सकता है। हो सकता है कि बच्चा किसी तरह से भटक कर बस्ती तक आ गया हो, लेकिन इस बच्चे को जंगल मंे छोडना ही हित कर रहेगा, क्योंकि इंसानो के बीच रहने के बाद हिरण के स्वभाव में बडे स्तर पर बदलाव होगा, जिसका खाामियाजा हिरण को काफी दिनो तक उठाना पड सकता है।
इटावा के प्रभागीय वन निदेशक मानिक चंद्र यादव का कहना है कि उन्हे इस बात की जानकारी मिली है कि कोई हिरण का बच्चा एक गांव में भटक कर आ गया है। वन विभाग के अमले को निर्देशित किया गया है कि जंगल से भटक करके आए हिरण के बच्चे को सुरक्षित जंगल में छुडवाया जाए, क्योंकि जंगल ही हिरणों का मूल प्राकृतिक वास स्थल है।

 

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