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90 सेकंड में 90 फाइल्स ट्रांसफर करता है यह ऐप
20 Apr 2015 IST
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बेंगलुरु
जब आपको कोई फाइल ट्रांसफर करनी हो तो आपको याद आते हैं वॉट्सऐप, जीमेल, गूगल ड्राइव, या ब्लूटूथ। लेकिन कभी-कभी लगने लगता है कि ये फाइल्स ट्रांसफर करने में या तो आपका इंटरनेट खा रहे हैं, या स्पीड की दिक्कत आने लगती है, फाइल का साइज बड़ा होने से समस्या होती है या फाइल ट्रांसफर होने की प्रक्रिया ही इतनी लंबी होती है कि खीझ उठने लगती है।

बेंगलुरु के दो युवाओं ने 'स्विफ्ट फाइल ट्रांसफर' नाम का एक ऐप डिवेलप किया है जो इन सभी समस्याओं से निजात दिलाता है और क्विकली फाइल्स ट्रांसफर करने में मदद करता है। 26 साल के आईटी इंजिनियर कुनाल महाजन और 23 साल के मैनेजमेंट ग्रैजुएट पंकज सिंह द्वारा डिवेलप किया गया यह ऐप इतना फास्ट है कि HD मूवी, दो HD विडियोज, फोटोज और ऐप्स को मिलाकर कुल 90 फाइल्स सिर्फ 90 सेकंड्स में ट्रांसफर कर सकता है।


स्विफ्ट फाइल ट्रांसफर एक सामान्य ऐप है जिसमें लॉग इन या साइन अप की कोई जरूरत नहीं है। सेंडर और रिसीवर दोनों के पास यह ऐप होना चाहिए। आपको सिर्फ ट्रांसफर करने के लिए फाइल चुननी है और फिर उस व्यक्ति को चुनना है जिसे फाइल ट्रांसफर करनी है। उसके बाद सेंडर सेंड बटन प्रेस करेगा और यूजर रिसीव बटन प्रेस कर उसे रिसीव कर सकेगा।

ऐप डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

स्विफ्ट फाइल ट्रांसफर से यूजर्स ऐप्स, फोटोज, फोल्डर्स, विडियो, गाने, तस्वीरें और ऑफिस के डॉक्युमेंट्स शेयर कर सकते हैं।

इस ऐप द्वारा ट्रांसफर की गई फाइल्स SFT नाम के एक अलग फोल्डर में सेव होती हैं लेकिन उन्हें साथ-साथ जनरल फोल्डर्स में भी डाला जा सकता है। कुनाल और पंकज ने कहा, कि यह ऐप सिर्फ ऐंड्रॉयड के लिए उपलब्ध है। पिछले दो महीनों में इस ऐप के 10,000 डाउनलोड्स हो चुके हैं और यूजर्स ने इसे 5 में से 4.4 रेटिंग दी है।

कैसे बना यह ऐप
कुनाल और पंकज अब तक एक-दूसरे से सिर्फ 3 बार मिले हैं और उन्होंने यह डिवेलपमेंट सिर्फ फोन पर मैनेज किया है। अगस्त 2014 में एक नॉर्मल डिस्कशन के दौरान कुनाल ने पंकज को फाइल ट्रांसफरिंग ऐप डिवेलप करने का सुझाव दिया।

पंकज ने कहा, 'कुनाल ने मुझे यह आइडिया दिया और कहा कि वह एक ऐसा कोड बनाने की कोशिश करेगा जो पूरी तरह अलग हो। उसे टेक्निकल नॉलेज है और मेरे पास मैनेजमेंट स्किल्स हैं जिससे हम चेक कर सकते हैं कि ऐसा प्रॉडक्ट चलेगा या नहीं। मैंने इसपर काम शुरू किया और स्पेस, मौजूदा टेक्नॉलजी के बारे में पता किया और समझा कि लोग इसे चाहेंगे भी या नहीं।'

इन दोनों ने अपने वर्क एरिया बांटे और अपनी-अपनी एक्सपर्टीज़ में काम किया।

टेक्निकल मामले देख रहे कुनाल को कोड डिवेलप करने में करीब 6 महीने लगे। उन्होंने कहा, 'टेक्नॉलजी पहले से मौजूद है, इसलिए ऐसा ऐप बनाना जरूरी था जो यूजर्स को कुछ अलग दे सके। मुझे कई लेवल की कोडिंग करनी पड़ी, टेस्टिंग करनी पड़ी और डिलीट भी करना पड़ा। लोगों को स्पीड चाहिए। 6 महीने से ज्यादा की कड़ी मेहनत के बाद मैंने एक कोड तैयार किया जो सभी मौजूदा ऐप्स से ज्यादा अच्छी स्पीड दे सकता था।'

इस ऐप को फिर कई यूजर्स में टेस्ट किया गया और दो महीने पहले गूगल प्ले स्टोर पर लॉन्च किया गया।

पंकज और कुनाल ने सोचा कि पहले वे देखेंगे कि इस ऐप को ऐंड्रॉयड फोरम पर कैसा रेस्पॉन्स मिल रहा है और फिर अगले लेवल पर जाएंगे।

मार्केटिंग टेकनीक
एक स्टार्टअप के तौर पर अपना प्रॉडक्ट प्रमोट करने के लिए इन दोनों को एक अलग और सस्ता रास्ता चाहिए था। पंकज ने कहा, 'हम दोनों स्टार्ट अप फोरम्स के जरिये मिले, तो हमें लगा कि प्रॉडक्ट की मार्केटिंग करने का सबसे सही तरीका उसे ऐसे फोरम्स से प्रमोट करना ही होगा।'

इन दोनों ने अलग-अलग कॉम्पिटिशन्स और स्टार्टअप फोरम्स में भाग लिया और अपने प्रॉडक्ट के बारे में बात की। इससे उन्हें अच्छा रेस्पॉन्स मिला।

भविष्य की तैयारी
इन दोनों को कई कम्पनियों से कोलैबोरेशन के ऑफर्स आए हैं लेकिन उन्होंने कहीं हामी नहीं भरी है।

कुनाल इस ऐप के अगले अपडेट पर काम कर रहे हैं। वह कहते हैं, 'ऐसा नहीं है कि हम मदद नहीं करना चाहते, बल्कि हम ज्यादा अपडेट्स कोड करना चाहते हैं और किस भी कोलैबोरेशन में जाने से पहले इसे पेटेंट करवाना चाहते हैं। हम फाइल ट्रांसफरिंग का सिस्टम बदलना चाहते हैं। हमारा अल्टिमेट प्रॉडक्ट वह होगा जिसमें फाइल ट्रांसफरिंग के लिए न तो किसी हार्डवेयर की जरूरत होगी और न ही इंटरनेट कनेक्शन या ब्लूटूथ की। मैं फिलहाल इसी पर काम कर रहा हूं।'

 

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