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17, January,2018 02:21:24
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News in Detail
तड़पते बच्चे का इलाज करने की बजाय भेजा प्राइवेट अस्पताल
30 Nov -0001 IST
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कहते है कि डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होता है | लेकिन मऊ जनपद में जिला अस्पताल के डॉक्टर जल्लाद से भी बदतर हो चुके है | वे अपनी जनता के प्रति जिम्मेदारी छोड़ ( ड्यूटी) छोड़ कर आराम फरमाने में ज्यादा वक्त गुजरते है | पूरा मामला यु है कि खेतो में कीटनाशक छिड़कने वाली दवा 3 वर्ष के बच्चे ने गलती से पी लिया जिसके बाद मरीज के परिजन बच्चे को ले केर भागे भागे जिला अस्पताल ले कर आते है | वहा ड्यूटी में मौजूद डॉक्टर सुबोध चन्द्र यादव जो कि अपने जोइनिंग के समय से ही हमेशा विवादों में रहे हैं यहाँ तक की ( सूत्र के अनुसार सरकारी डॉक्टरों की कमी और सरकार की मजबूरी से सभी डॉक्टर बखूबी वाकिफ हैं जिसके दम और पूर्व वर्ती सरकार के किसी मंत्री के रिश्तेदार होने के साथ चीफ मेडिकल ऑफिसर को यह कहते हुवे दबाव में ले लिया कि यादव हूँ दवा से ज्यादा दूध बेचने में फायदा है मुझे नौकरी नहीं करना है और सरकार की मजबूरी भी मै जानता हूँ ) वही डॉक्टर एमरजेंसी ड्यूटी छोड़ दुसरे कमरे में आराम फरमा रहे होते है | फार्मासिस्ट ने मीडिया और मरीज पहुँचने के बाबत डॉक्टर को सूचना देकर इमरजेंसी में बुलाया | डॉ सुबोध ने इमरजेंसी में आकर बच्चे की हालत देखने के बाद उसके भड़के हुवे तीमारदारो को ये समझाने में लग जाते है कि उनके पास सारी सुविधाए नहीं है वो अपने मरीज को किसी और अस्पताल में ले के जाये | मरीज के परिजन गिडगिडाते रहते है लेकिन डॉक्टर सुबोध चन्द्र यादव का दिल नहीं पसीजता है | थक हार कर मरीज के परिजन इनकी ड्यूटी में अपने मरीज को प्राइवेट अस्पताल ले के जाने पर मजबूर हो जाते है |

वही इस कैमरे में कैद पूरी खबर पर मीडिया ने जिला अस्पताल के सी एम् एस डॉ ब्रिज कुमार से पूछा तो उन्होंने दबाव वश डॉक्टर का ही बचाव करने लगे और हमें ही बताने लगे की ये भी कोई खबर है | आप लोग ऐसी खबरों पर ध्यान न दिया करे | कोई ढंग की खबर आप लोग बनाया करें | जब सी एम् एस डॉ ब्रिज कुमार से पूछा गया कि क्या फ़ूड पॉयजन वाश करने की सुविधा इस जिला अस्पताल में है | तो डॉ ब्रिज कुमार ने बताया की उनके अस्पताल में पॉयजन वाश करने की पूरी सुविधा है | लेकिन डॉक्टर के आराम करने के सवाल पर सी एम् एस ने डॉक्टर सुबोध चन्द्र यादव का बचाव करते ही नज़र आये | एसे में यह सवाल उठाना लाजमी है कि क्या डॉक्टर सिर्फ अस्पतालों में आराम फरमाने आते है और सरकार के पास जनता के दिए हुवे तनख्वाह की लालच में परिवार के भरण पोषण का लाभ लेने के लिए ही आते हैं | ताकि उन्हें आरक्षण का लाभ ले केर मिले नौकरी में मरीजो का इलाज न करना पड़े , इस लिए सरकारी अस्पतालो से मरीजो को प्राइवेट अस्पतालों में रेफर कर देते है |

बाइट - डॉ ब्रिज कुमार ( सी एम् एस जिला अस्पताल ,मऊ )

 

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