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तीन बार भूकंप के झटके झेल चुका है ताज,
28 Apr 2015 IST
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आगरा. हाल में आए भूकंप के झटकों से भले ही ताजमहल को कोई नुकसान न पहुंचा हो, लेकिन वक्त के साथ ऐसे झटकों को सहने की उसकी क्षमता कम होती जा रही है। मुगल शासक शाहजहां द्वारा भूकंपरोधी बनाए जाने की वजह से अब तक ताजमहल को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है। इससे पहले भी ताज तीन बार भूकंप के तेज झटके झेल चुका है। वहीं इसके और यमुना के बीच बना पार्क भी आने वाले वक्त में दुनिया के सातवें अजूबे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
ताजमहल अब तक तीन बार भूकंप से तेज झटके झेल चुका है। एएसआई के निदेशक डॉ. डी दयालन की किताब में इसका जि‍क्र है। उन्‍होंने बिशन कपूर की पुस्तक ‘ग्लिम्प्सेज ऑफ आगरा’ के हवाले से लिखा है कि साल 1803 में भूकंप की वजह से सबसे पहले ताजमहल की मीनारों और कब्र की फर्श पर दरार आ गई थी। उस वक्‍त चांदी पिघलाकर इनको भरा गया था।
एएसआई की साल 1925-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1905 में आए भूकंप की वजह से ताजमहल की दक्षिणी दीवार और सामने के पत्‍थर में दरार पड़ गई थी। हालांकि उसे जल्द ही भर दिया गया था, लेकिन एएसआई की साल 1935-36 की रिपोर्ट के अनुसार, ताजमहल को भूकंप का सबसे तेज झटका 15 जनवरी, 1934 को लगा था। इसमें मस्जिद के कई लाल पत्थर गिर गए। उस वक्त भी भूकंप का केंद्र नेपाल था और तीव्रता 8.3 आंकी गई थी। तब ताजमहल की मस्जिद की मरम्‍मत में 26 हजार 951 रुपए खर्च हुए थे।
भूकंपरोधी बनाया गया था ताजमहल
मुगलों ने ताजमहल को भूकंपरोधी बनाया था। इस वजह से उस वक्‍त ताजमहल जबरदस्‍त भूकंप सह गया, लेकिन अब धीरे-धीरे उसकी क्षमता कम होती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ताजमहल और यमुना के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण (एएसआई) ने पार्क का निर्माण करके यमुना को करीब सौ गज दूर कर दिया है।
खतरनाक साबित हो सकता है पार्क
प्रख्‍यात इतिहासकार प्रो. आर नाथ ने चेतावनी दी कि यह पार्क 17वीं सदी के प्‍यार की निशानी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।ताजमहल की नींव बहुत हद तक यमुना पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि नदी के पानी को हर हाल में ताजमहल को छूकर ही जाना चाहिए। साल 2003 से पहले की तस्‍वीरों को यदि गौर से देखा जाए तो उसमें यमुना नदी का पानी ताजमहल के पिछले हिस्‍से को छूकर निकलता हुआ दिखाई देता है।
ताज की मूल योजना में नहीं था पार्क
ब्रज मंडल हेरिटेज कंजर्वेशन सोसायटी के अध्‍यक्ष सुरेंद्र शर्मा के मुताबिक, उन्होंने पार्क के निर्माण पर आरटीआई दाखिल की थी। जवाब में भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण ने कहा कि ताजमहल की मूल योजना में यह पार्क नहीं था, लेकिन इस बात को समझने के लिए एएसआई के अधिकारी तैयार नहीं हैं। यमुना को पार्क के जरिए ताजमहल से दूर धकेल दिया गया है।
थोड़ी बाहर की ओर झुकी हैं मीनारें
एएसआई के आगरा सर्किल के पूर्व अधीक्षक एनके पाठक के मुताबिक, ताजमहल की मीनारें बाहर की ओर थोड़ी झुकी हुई हैं। भूकंप का काफी तेज झटका आने पर वो बाहर की ओर गिरेंगी। इससे गुंबद को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। वहीं मौजूदा अधीक्षक पुरातत्वविद् डॉ. भुवन विक्रम ने बताया कि बीते शनिवार और रविवार को आए भूकंप के बाद स्थिति सामान्य है। भूकंप से ताजमहल या और किसी स्मारक को कोई क्षति नहीं पहुंची है। हालांकि उन्होंने ताजमहल और यमुना के बीच बने पार्क के निर्माण के सवाल पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
कुंओं में पानी की जगह हैं लकड़ियां
एक अन्‍य इतिहासकार राजकिशोर राजे का कहना है कि ताजमहल के भूकंपरोधी निर्माण की नींव कुंओं का होना है। इन कुंओं में लकड़ियां भरी हुई हैं, जबकि इनमें पानी होना चाहिए, ताकि ताज भूकंप के झटके झेल सके। मुगल शासक शाहजहां यमुना के रास्‍ते से ताजमहल में दाखिल होते थे। इसका गेट अब बंद किया जा चुका है। ताजमहल की यमुना से दूरी बढ़ाकर पार्क का निर्माण करना संरक्षण नहीं है।

 

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