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कैबिनेट की अहम बैठक खत्म, FDI पॉलिसी को बनाया आसान
16 Jul 2015 IST
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नई दिल्ली।
मोदी सरकार ने देश में विदेशी निवेश को बढ़ाने के मकसद से एफडीआई पॉलिसी को और आसान बना दिया है। सरकार ने अलग-अलग सेक्टरों में एफडीआई, एफआईआई और निवेश के दूसरे इंस्ट्रूमेंट्स को एक दायरे में लाने का फैसला करते हुए कंपोजिट एफडीआई कैप को मंजूरी दे दी है।
आपको बता दें कि करीब 12 सेक्टर जैसे प्राइवेट सेक्टर बैंकिंग, एयरलाइंस, इंश्योरेंस और डिफेंस सेक्टर में कंपोजिट कैप प्रस्तावित है। कंपोजिट कैप से पावर, कमोडिटी एक्सचेंज, क्रेडिट इंफोर्मेशन कंपनी, मार्केट इंफ्रा कंपनीज को फायदा होगा जिनकी मौजूदा सेक्टोरल कैप तो ज्यादा है पर विदेशी निवेशकों के लिए कैप काफी कम है।
इसके अलावा सबसे ज्यादा असर उन सेक्टरों पर दिखेगा, जहां ऑटोमैटिक रूट से ज्यादा निवेश के लिए एफआईपीबी की मंजूरी जरूरी होती है। फिलहाल, सिंगल ब्रांड रिटेल में 49 फीसदी, मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी से ज्यादा के निवेश पर सरकार की मंजूरी लेना जरूरी है।
एचडीएफसी के वाइस चेयरमैन और सीईओ केकी मिस्त्री के मुताबिक, कंपोजिट कैप आने से बैंकिंग सेक्टर को काफी फायदा होगा। सरकार के फैसले से काफी निवेश की आने की उम्मीद है। सरकार ने इस फैसले के साथ रिफॉर्म की तरफ कदम बढ़ाया है। सरकार के फैसले से पारदर्शिता बढ़ेगी और कारोबार करना आसान होगा।
कैबिनेट और सीसईए की बैठक में सरकार ने चार सौ रेलवे स्टेशनों को रीडेवलप करने का ऐलान किया है। इन चार सौ रेलवे स्टेशनों को स्विस चैलेंज पद्धति के जरिए डेवलप किया जाएगा। रेलवे स्टेशनों के डेवलप के लिए नए तरीके टेंडरिंग करने की योजना है। साथ ही, सरकार ने ई-कोर्ट के गठन को मंजूरी दी है। सरकार ने आरआरबी के रीकैपिटलाइजेशन के लिए सात सौ करोड़ रुपए की अतिरिक्त फंडिंग मंजूर की है।

 

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