Corporate: H-70, Sector-63, Noida (UP), 201301
Studio: C-56, A/20, Sec-62, Noida (UP)

होम बड़ी खबर राज्य खेल विश्व मनोरंजन आस्था
जरा इधर भी व्यापार जोक्स हमारे बारे में पत्रिका
18, February,2018 08:59:21
घर में घुसकर दो युवतिओं पर फायरिंग, एक की मौत, एक घायल हड़कम्प | घर में घुसकर दो युवतिओं पर फायरिंग, एक की मौत, एक घायल हड़कम्प | असलाह फैक्ट्री में छापा मारने गर्इ पुलिस ने मुठभेड़ में पकड़ा इनामी बदमाश | जेई की पिटाई का मामला | तेज रफ्तार पोलो कार ने आधा दर्जन गाड़ियों में मारी टक्कर | भाजपा सांसद हुकुम सिंह के देहांत का मामला | आगरा ब्रेकिंग थाना हरीपर्वत क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट नगर में ट्रक की दो बॉडी में लगी भीषण आग दमकल की गाड़ियां मौके पर | सहारनपुर पुलिस की 24 में दूसरी मुठभेड़ | जेसीबी को रात में नदी में उतारने की कवायद | मृतका हेमलता पैकरा कोरिया जनपद सदस्य हैं |
News in Detail
पुलिस के लिए एफआईआर दर्ज करना हुआ जरूरी
13 Nov 2013 IST
Print Comments    Font Size  
नई दिल्ली।
संगीन वारदातों की एफआईआर दर्ज करने में पुलिस अब नानुकूर नहीं कर सकेगी। सर्वोच्च अदालत ने हत्या, डकैती, लूट, दुराचार आदि संगीन मामलों में तत्काल रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए है। पुलिस अब यह बहाना नहीं बना सकेगी कि पहले मामले की जांच की जाएगी और उसके बाद रिपोर्ट दर्ज होगी। सीआरपीसी की धारा 154 के तहत अपराध की जानकारी मिलने पर प्राथमिकी दर्ज करना जरूरी कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने यह अहम फैसला सुनाया है। आदेशों की अवहेलना करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का भी प्रावधान रखा गया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की खंडपीठ ने कहा कि अगर पुलिस को संज्ञेय अपराध के होने का पता चलता है तो इसके लिए एफआईआर दर्ज किया जाना अति आवश्यक है। ऐसे मामलों में प्रारंभिक जांच की कोई गुजांईश नहीं और ना ही कोई अनुमति है। हालांकि जिन अपराधों में संज्ञेय होने का पता नहीं चलता तो ऐसे मामलों में पुलिस सीमित समय में जांच कर कार्रवाई कर सकती है। संविधान पीठ ने कहा कि इस जांच का दायरा सूचना की सत्यता की पुष्टि करना नहीं बल्कि यह जानकारी प्राप्त करने के लिए है कि क्या इससे किसी संज्ञेय अपराध का पता चलता है संविधान पीठ ने कहा कि यदि पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने में अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई, तो इसके सार्वजनिक व्यवस्था पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं और पीडितों के अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में जस्टिस बलबीर सिंह चैहान, रंजना प्रकाश देसाई, रंजन गोगोई और शरद बोबडे शामिल हैं। संविधान पीठ ने कहा कि किसी मामले के तथ्यों के आधार पर वैवाहिक विवाद, वाणिज्यिक अपराध, मेडिकल लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में प्रारंभिक जांच की अनुमति दी जा सकती है।

 

Send Comments
Name
Location
Email
Comments
  Please Enter the above Characters
होमबड़ी खबरराज्यखेलविश्व लाइफ स्टाइलआस्था
जरा इधर भी व्यापार जोक्स हमारे बारे में
 
 

 

Copy Rights Reserved By www.indiacrime.in - 2015